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नही रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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  Breking News-  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी    84 साल की उम्र मे ली अंतिम सास  भारतीय राजनीति का एक और युग का अवशन  कोरोना सकरमं के चलते हुआ फेपड़ो      संक्रमन से  84 साल की  उम्र मे ली अंतिम सास     दिल्ली:  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. वह लम्बे समय से बीमार थे और कौमा में थे. उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने की है

काग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का दिल का दोरा पड़ने से हुआ निधन

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  ब्रेकिंग न्यूज़ : कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का दिल का दोरा पड़ने से निधन कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी का निधन हो गया है. राजीव त्यागी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी. उन्हें गंभीर हालत में गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. राजीव त्यागी कांग्रेस के तेज-तर्रार प्रवक्ता थे और टीवी चैनलों पर डिबेट में प्रभावशाली तरीके से पार्टी का पक्ष रखते थे. रिपोर्ट के मुताबिक राजीव त्यागी की तबीयत आज दिन भर ठीक थी. शाम को उन्हें आजतक पर टीवी डिबेट में शामिल होना था. खुद ट्वीट करके उन्होंने इसकी जानकारी भी थी. उन्होंने लिखा था कि आज शाम 5:00 बजे आज तक पर रहूंगा. शाम को 5 बजे वे आजतक पर टीवी डिबेट में शामिल भी हुए थे.रहूंगा. शाम को 5 बजे वे आजतक पर टीवी डिबेट में शामिल भी हुए थे.

नई शिक्षा नीति 2020

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New Education Policy india  : साल में एक नहीं, 2-3 बार होंगी परीक्षाएं ताकि कम हो छात्रों पर   तनाव सन् 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। उसके बाद से इसमें कभी कोई भी बदलाव नहीं किया गया था हालाँकि चर्चा जरूर हुई थी।  इसमें जीडीपी का  6प्रतिशत  हिस्सा Education sector पर खर्च किया जाएगा।।      इस  शिक्षा नीति का प्रारूप  इसरो के वैज्ञानिक रह चुके   के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली कमेटी ने बनाया है।। Comment करके बताई की यह शिक्षा नीति आप को किसी लगी 👇👇 इस शिक्षा नीति को लाने के कारण – इससे पहले की शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी। उसमें ही संशोधन किए गए थे। लंबे समय से नई नीति की मांग हो रही थी।  एजुकेशन पॉलिसी एक कॉम्प्रेहेंसिव फ्रेमवर्क होता है जो देश में शिक्षा की दिशा तय करता है। यह पॉलिसी मोटे तौर पर दिशा बताता है और राज्य सरकारों से उम्मीद है कि वे इसे फॉलो करेंगे। हालांकि, उनके लिए यह करना अनिवार्य नहीं है। पर फिर भी उन से उम्मीद है की वे इसे फॉलो करे।।   यह पॉलिसी सीबीएसई तो लागू करेगी ही, ...

कारगिल विजय दिवस क्यों मनाते है

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21 Years Of Operation Vijay Kargil Diwas:  ऑपरेशन विजय को 21 साल पूरे, आज ही के दिन पाकिस्तान को हराकर भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में लहाराया था तिरंगा🇮🇳🇮🇳 कारगिल विजय युद्ध से पहले :- 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई सैन्य संघर्ष होता रहा। दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था।  प्रारम्भ में इसे घुसपैठ मान लिया था और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा। लेकिन नियंत्रण रेखा में खोज के बाद और इन घुसपैठियों के नियोजित रणनीति में अंतर का पता चलने के बाद भारतीय सेना को अहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर किया गया है। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को...

अनुसूची 9 क्या हैं और इतनी चर्चा मे क्यु हैं

क्या है 9वीअनुसूची?                                             ➤1951 मे केंद्र सरकार ने सविधान मे संशोधन करके 9 वी अनुसूची का प्रावधान किया था ताकि उसके द्वारा किये जाने वाले भूमि सुधारों को चुनोती न दी जा सके ➤ उस समय जब सरकार द्वारा शुरू किये गए भूमि सुधारों को बिहार ,मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश  की अदालतों में चुनोती दी गई थी जिसमे से बिहार मे इस कानून को अवेध ठहराया गया  ➤ इस विषम परिस्थितियों से बचने के लिए और सुधारों को जारी रखने के लिए सरकार ने सविधान मै यह अनुसूची प्रथम सविधान संशोधन के अधिनिय, 1951 के तहत जोड़ी थी इस अनुसूची मे यह पेच हैं?  ➤पहले यह मन्यता थी की 9वी अनुसूची मे समिलित कानूनों को  न्यायिक समीक्षा या उन्हें न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती लेकिन 11 जनवरी 2007 के संविधान पीठ के एक निर्णय द्वारा यह स्थापित किया गया कि 9वीं अनुसूची में सम्मिलित किसी भी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों क...