नई शिक्षा नीति 2020

New Education Policy india : साल में एक नहीं, 2-3 बार होंगी परीक्षाएं ताकि कम हो छात्रों पर  तनाव

सन् 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। उसके बाद से इसमें कभी कोई भी बदलाव नहीं किया गया था हालाँकि चर्चा जरूर हुई थी। 

इसमें जीडीपी का  6प्रतिशत  हिस्सा Education sector पर खर्च किया जाएगा।।


  

 इस  शिक्षा नीति का प्रारूप इसरो के वैज्ञानिक रह चुके   के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली कमेटी ने बनाया है।।

Comment करके बताई की यह शिक्षा नीति आप को किसी लगी 👇👇


इस शिक्षा नीति को लाने के कारण


इससे पहले की शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी। उसमें ही संशोधन किए गए थे। लंबे समय से नई नीति की मांग हो रही थी। 

एजुकेशन पॉलिसी एक कॉम्प्रेहेंसिव फ्रेमवर्क होता है जो देश में शिक्षा की दिशा तय करता है। यह पॉलिसी मोटे तौर पर दिशा बताता है और राज्य सरकारों से उम्मीद है कि वे इसे फॉलो करेंगे। हालांकि, उनके लिए यह करना अनिवार्य नहीं है। पर फिर भी उन से उम्मीद है की वे इसे फॉलो करे।। 

 यह पॉलिसी सीबीएसई तो लागू करेगी ही, राज्यों में अपने-अपने स्तर पर फैसले लिए जाएंगे। यह बदलाव जल्द नहीं होंगे बल्कि इसमें समय लग सकता है। 

स्कूल शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलर फ्रेमवर्क के तौर पर स्कूल करिकुलम (एनसीएफएसई) का ओवरहॉल किया गया था। इसे नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एऩसीईआरटी) करेगा।


और आपके लिए क्या क्या नया होगा

  • नई शिक्षा नीति के तहत तकनीकी संस्थानों में भी आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के विषय पढ़ाए जाएंगे। साथ ही देश के सभी कॉलेजों में म्यूजिक, थिएटर जैसे कला के विषयों के लिए अलग विभाग स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
  • कैबिनेट ने एचआरडी (ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट) मिनिस्ट्री का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन करने की मंजूरी भी दी है। 

  •  दुनियाभर की बड़ी यूनिवर्सिटीज को भारत में अपना कैंपस बनाने की अनुमति भी दी जाएगी।

  • IITS समेत देश भर के सभी तकनीकी संस्थान होलिस्टिक अप्रोच ( समग्र दृष्टिकोण) को अपनाएंगे। इंजीनियरिंग के साथ-साथ तकनीकी संस्थानों में आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया जाएगा।
  • देशभर के सभी इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए एक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराए जाने की बात भी कही गई है। यह एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी। हालांकि, यह ऑप्शनल होगा। सभी स्टूडेंट्स के लिए इस एग्जाम में शामिल होना अनिवार्य नहीं रहेगा। जो शामिल होने मे रुचि रखते है वही शामिल हो
  • स्टूडेंट्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा कन्नड़, उड़िया और बंगाली में भी ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए जाएंगे। वर्तमान में अधिकतर ऑनलाइन कोर्स इंग्लिश और हिंदी में ही उपलब्ध हैं।
  • नई शिक्षा नीति में GDP का 6% हिस्सा एजुकेशन सेक्टर पर खर्च किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में केंद्र और राज्य को मिलाकर GDP का कुल 4.43% बजट ही शिक्षा पर खर्च किया जाता है।


स्कूल की पढ़ाई में क्या बदलाव होंगे –

मौजूदा व्यवस्था में तीन स्तर है और नए सिस्टम में पांच स्तर होंगे। यह हर स्तर पर हुनरमंद नई पीढ़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

अभी तक की नीति  मे 6 वर्ष का बच्चा कक्षा 1 में आता है। नए सिस्टम में ज्यादा बदलाव नहीं है। लेकिन इसके मूल ढांचे में थोड़ा बदलाव किया है।

  • 6 से 9 वर्ष के बच्चों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान पर फोकस होगा। इसके लिए नेशनल मिशन बनेगा। पूरा फोकस होगा कक्षा 3 तक के बच्चों का फाउंडेशन मजबूत बने।
  • कक्षा 5 तक तक आते-आते बच्चे को भाषा और गणित के साथ उसके स्‍तर का सामान्य ज्ञान होगा। डिस्कवरी और इंटरेक्टिवनेस इसका आधार होगा यानी खेल-खेल में सारा सिखाया जाएगा।
  • कक्षा 6-8 तक के लिए मल्‍टी डिसीप्लीनरी कोर्स होंगे। एक्टिविटीज के जरिये पढ़ाएंगे। कक्षा 6 के बच्‍चों को कोडिंग सिखाएंगे। 8वीं तक के बच्चों को प्रयोग के आधार पर सिखाया जाएगा।
  • कक्षा 9 से 12 तक के बच्‍चों के लिए मल्टी-डिसीप्लीनरी कोर्स होंगे। यदि बच्चे की रुचि संगीत में है, तो वह साइंस के साथ म्यूजिक ले सकेगा। केमेस्ट्री के साथ बेकरी, कुकिंग भी कर सकेगा।
  • कक्षा 9-12 में प्रोजेक्‍ट बेस्ड लर्निंग पर जोर होगा। इससे जब बच्‍चा 12वीं पास करके निकलेगा, तो उसके पास एक स्किल ऐसा होगा, जो आगे चलकर आजीविका के रूप में काम आ सकता है।
  • आकाश एजुकेशनल सर्विसेस लिमिटेड के सीईओ आकाश चौधरी के मुताबिक नई व्यवस्था हुनर-आधारित शिक्षा का महत्व बढ़ाएगी। युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी।

बोर्ड परीक्षा के बारे में –

  • नई शिक्षा नीति में नियमित और क्रिएटिव असेसमेंट की बात कही गई है। कक्षा 3, 5 और 8 में स्कूली परीक्षाएं होंगी। इसे उपयुक्त प्राधिकरण संचालित करेगा।
  • कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षाएं जारी रहेंगी। इनका स्वरूप बदल जाएगा। नया नेशनल असेसमेंट सेंटर ‘परख’ मानक-निर्धारक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा। 

क्या है ECCE?

  • ECCE का मतलब है अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन। इसके तहत बच्चे को बचपन में जिस देखभाल की आवश्यकता होती है उसे शिक्षा के साथ जोड़ा गया है।
  • NCERT इसके लिए नेशनल कोर्स और एजुकेशनल स्ट्रक्चर बनाएगा। बच्चों की देखभाल और पढ़ाई पर फोकस रहेगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बेसिक टीचर्स को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • तीन से आठ वर्ष आयु के बच्चों को दो हिस्सों में बांटा है। पहले हिस्से में यानी 3-6 वर्ष तक बच्चा ECCE में रहेगा। इसके बाद 8 वर्ष का होने तक वह प्राइमरी में पढ़ेगा।

अब जानिए ओपन लर्निंग विकल्प के बारे मै –

  • कक्षा 3, 5 और 8 के लिए ओपन लर्निंग का विकल्प रहेगा। ताकि स्कूलों से बाहर रह रहे दो करोड़ छात्रों को फिर पढ़ाई से जोड़ा जा सके। इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जाएगा।
  • इसके साथ-साथ, कक्षा 10 और 12 के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा कार्यक्रम, वोकेशनल कोर्सेस, वयस्क साक्षरता और लाइवलीहुड प्रोग्राम प्रस्तावित है।
  • सभी को पढ़ाई पर बराबरी से हक मिले इसके लिए सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित ग्रुप्स (SEDG) पर विशेष जोर रहेगा। इसके लिए विशेष फंड रखा जाएगा।

 इंटर्नशिप क्या रहेगा?

  • फिलहाल शिक्षा का फोकस इस बात पर है कि कैसे लाभ हासिल किया जाए। लेकिन नए सिस्टम में पूरा फोकस व्यवहार पर आधारित शिक्षा पर होगा।
  • स्कूलों में कक्षा 6 से ही व्यवसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी। इसमें इंटर्नशिप भी शामिल होगी। ताकि बच्चों को पास के किसी उद्योग या संस्था में ले जाकर फर्स्टहेंड एक्सपीरियंस दिया जा सकेगा।

त्रि-भाषा formula ?

  • नई शिक्षा नीति में कम से कम कक्षा 5 तक बच्चों से बातचीत का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा/ क्षेत्रीय भाषा रहेगी।
  • छात्रों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को विकल्प के रूप में चुनने का अवसर मिलेगा। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्‍प शामिल होगा।
  • पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प होंगे। कई विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एक विकल्‍प के रूप में चुना जा सकेगा।
  • भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज को मानकीकृत किया जाएगा और बधिर छात्रों के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्‍तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएंगी।।
स्कूली स्ट्रक्चर में बदलाव केसे आएंगे?
  • स्कूलों के प्रशासनिक ढांचे को कई स्तरों पर बदला जा रहा है। स्कूलों को परिसरों या क्लस्टरों में बांटा जा सकता है, जो गवर्नेंस की मूल इकाई होगा।
  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्वतंत्र स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी बनाएंगे। एससीईआरटी सभी संबंधितों से परामर्श कर स्कूल क्वालिटी असेसमेंट फॉर्मेट बनाएगी।

अब जानिए हायर एजुकेशन के बारे में–

  • सबसे पहले तो एनरोलमेंट बढ़ाना है। वोकेशनल के साथ-साथ हायर एजुकेशन में एनरोलमेंट 26.3 प्रतिशत (2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है। 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ेंगे।
  • कॉलेज में एक्जिट विकल्प होंगे। अंडर-ग्रेजुएट शिक्षा 3-4 वर्ष की होगी। एक साल पर सर्टिफिकेट, 2 वर्षों पर एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों पर ग्रेजुएट डिग्री तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ ग्रेजुएट।
  • एक एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना की जानी है, जिससे कि इन्हें अर्जित अंतिम डिग्री की दिशा में अंतरित एवं गणना की जा सके।

कॉलेजो में केसे बदलाव होंगे–

  • चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त हायर एजुकेशन के लिए हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बनाया जाएगा। यह यूजीसी की जगह लेगा।
  • आईआईटी और आईआईएम के दर्जे की मल्टी-डिसीप्लीनरी एजुकेशन और रिसर्च यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी। यह ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को फॉलो करेगी।
  • टॉप बॉडी के रूप में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य हायर एजुकेशन में रिसर्च को एक कल्चर के रूप में विकसित करना और क्षमता बढ़ाना होगा।
  • यूनिवर्सिटी की परिभाषा भी बदलने वाली है। इसमें रिसर्च-फोकस्ड यूनिवर्सिटी से टीचिंग-फोकस्ड यूनिवर्सिटी और डिग्री देने वाले स्वायत्त कॉलेज शामिल होंगे।
  • 15 साल में धीरे-धीरे कॉलेजों की संबद्धता खत्म की जाएगी। उन्हें धीरे-धीरे स्वायत्त बनाया जाएगा। यह कॉलेज आगे चलकर डिग्री देने वाले स्वायत्त कॉलेज बनेंगे या किसी यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेज।
  • एनसीईआरटी की मदद से एनसीटीई टीचर्स ट्रेनिंग के लिए नया और व्यापक नेशनल करिकुलम स्ट्रक्चर तैयार करेगा। पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता 4 साल का इंटिग्रेटेड बीएड डिग्री होगी।


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